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Wednesday, September 05, 2018

the poem of love IN HINDI.





आज कल जो ये तुम सितम ढाने लगी हो,

नज़रें मिलाके जो ये कहर ढाने लगी हो!

लगता है, जान लेके ही मानोगी मेरी,

ये तुम रोज़-रोज़ सपनो मे जो आने लगी हो!!

ये जो तुम रोज़ सपनो मे आती हो,

रोज़-रोज़ आके मुझे तड़पाती हो!

आज कल मै तो सोता  ही रहना  चाहता हूँ!

 अब क्या चैन से  सोने भी नहीं देना चाहती  हो !

जो सपनों आके यूँ चुप-चाप जाने लगी हो!!

ये तुम  रोज़-रोज़ सपनो मे जो आने लगी हो!!

अब तो ये सपने सच होने दुआ करता हूँ,

रातों मे क्या दिन मे भी तेरे सपने देखा करता हूँ!

किसी दिन तो तू मिलेगी मुझे,,

अब पल-पल तुम याद आने लगी हो!

ये  तुम  रोज़-रोज़ सपनो मे जो आने लगी हो!!

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! 

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